धर्म के नाम पर
धर्म के नाम पर फलता फूलता अधर्म…
लोग अक्सर सड़क किनारे किसी पेड़ के नीचे एक पत्थर रख देते है।
उस पर लाल या पीला कुछ लगा देते है, बस हो गया।
आने जाने वाले लोग पहले तो ज़रा सा सर झुका कर निकल लेते हैं पर धीरे धीरे चढ़ावा, फूल और प्रसाद भी चढ़ने लगता है।
समय के साथ उस पेड़ के आसपास की ज़मीन उस तथकथित मंदिर की हो जाती है।
ये है हमारे देश में धर्म का स्वरूप!
यहाँ धर्म के नाम पर ऐसे अधर्म सभी गाँवों और शहरों में आम बात है।
एक और धर्म की बात!
उन्हें सरकारी ज़मीन पर खुले में नमाज़ अदा करनी है।
अब यदि सरकार या प्रशासन इस बात का विरोध कर दे तो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचतीं है।
इस देश में धर्म के नाम पर सब जायज़ है।
कोई रोक टोक नही।
यहाँ धर्म सड़कों पर बिखरा पड़ा है।
इसी धर्म या अधर्म पर राजनीतिक पार्टियों का वोट बैंक खड़ा है।
कोई भी नेता ग़लत को ग़लत नही कहता।
रास्ते और चौराहे धर्मिक आयोजनो के लिए रोक लिए जातें है।
अक्सर इनके पास प्रशासन की अनुमति तक नही होती है।
इन आयोजनो में सभी दलों के नेता देखे जाते है।
सब चलता है।
ये मूर्खों का देश है और धूर्त यहाँ राज करते हैं।
जागरण के नाम पर सारी रात माइक से शोर होता है।
सुबह सुबह कही अज़ान तो कहीं आरती सुनाई देती है।
किसी को परवाह नही होती की कोई पढ़ने का प्रयास कर रहा होगा।
कही कोई बूढ़ा या बीमार इस शोर के कारण परेशान होगा।
हमारे देश में किसी भी व्यापार या फ़ैक्टरी के लिए N.O.C. आवश्यक है।
पर धर्म और आस्था के नाम पर कोई क़ानून नही है।
जहाँ मन आए दरी या चादर फैला लें और शुरू कर दें अधर्म का धंधा।
कोई रोकटोक नही होगी।
अख़िर जनता को नाराज़ तो नही कर सकते।
वोट तो इनसे ही लेने हैं!

